शब्दों की दुनिया

चलो जलाए दीप वहां, जहाँ अभी अँधेरा है.

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प्रभुजी


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नानक : एक कहानी

Posted On: 2 Dec, 2012  
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मेरा हमसफर

Posted On: 27 Nov, 2012  
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तरुणाई का दीप जले

Posted On: 15 Nov, 2012  
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एक रिपोर्ट -दो सन्दर्भ

Posted On: 15 Oct, 2012  
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दो पल साथ चलो

Posted On: 11 Oct, 2012  
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भूतों की अधूरी बात ……

Posted On: 7 Oct, 2012  
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तुम्हारे लिए ..

Posted On: 4 Oct, 2012  
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पिता और मैं – एक दृश्य

Posted On: 3 Oct, 2012  
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नारी तेरी कथा निराली

Posted On: 1 Oct, 2012  
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मेरा जन्म

Posted On: 30 Sep, 2012  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: प्रभुजी प्रभुजी

के द्वारा: prabhuji prabhuji

प्रभु दयाल जी, ऐसा लगता है आपने भी प्रेम विवाह ही किया होगा, अन्यथा इतना गहरा और सटीक विश्लेषण बहुत मुश्किल होता! मैंने भी प्रेम विवाह किया है इसलिए आपकी बातों की गहराई मेरी समझ में आ रही है! आज आधुनिक युग में जहां बहुत सारे विवाहित जोड़े एक-दुसरे से तलाक लेने में अधिक हिचकिचाते नज़र नहीं आ रहे हैं, वहीँ प्रेम विवाह के असफल होने की मामले अधिक हैं! जैसा की आपने इसका कारण झूठ की बुनियाद होना बताया सत्य है! साथ ही एक बात और की परिवार वाले बहु की छोटी छोटी गलतियों पर लड़के को अक्सर भड़काते रहते हैं की तुम्हारी पसंद गलत थी, लड़की को कुछ नहीं आता, यह तो हमेशा गलतियां करती रहती है, हमारा ध्यान नहीं रखती....इत्यादि! इससे कभी कभी लड़के का दिमाग खराब हो जाता है और ये अक्सर लड़के लड़की के बीच लड़ाई और तलाक या आत्महत्या का कारण बन जाता है! देखा जाए तो अन्य विवाहों में भी अब पहले से ज्यादा तलाक हो रहे हैं! अन्य विवाहों के असफल होने का कारण है की आज पहले की अपेक्षा लड़कियां अपने पैरों पर खड़ी हैं, उन्हें पति के साथ नाजायज़ समझौते करने की उतनी आवश्यकता नहीं है जितनी की पहले थी, माता-पिता शादी के बाद लड़की के तलाक लेकर वापस आ जाने को उतना गलत नहीं मानते जितना की पहले मानते थे ! दरअसल पुरुषों को बचपन से औरतों के आगे श्रेष्ठ बने रहने की शिक्षा दी जाती है! ऐसे में आज-कल जब स्त्रियाँ अपने पैरों पर खड़ी होकर या अन्यथा पढ़-लिखकर अपने अधिकारों की बातें करने लगती हैं तो पुरुष के लिए उन्हें पचाना और सामंजस्य बिठाना बहुत मुश्किल हो जाता है....साथ ही ससुराल वालों की उम्मीदों को ऐसे आधुनिक समाज में पलने वाली, अपने अधिकारों को जान्ने वाली लड़कियों के लिए पूरा कर पाना आसान नहीं होता! यही सब आज विवाहों के असफल होने के कुछ कारण हैं! आपका लेख अच्छा लगा शायद मेरी प्रतिक्रिया भी कुछ ज्यादा ही लम्बी हो गयी..... लड़के लड़की पर लिखे गए मेरे इस लेख पर अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कराईयेगा...धन्यवाद http://panditsameerkhan.jagranjunction.com/2012/09/19/girlsvsboys/

के द्वारा: Anil Kumar "Pandit Sameer Khan" Anil Kumar "Pandit Sameer Khan"

मैं सनातन हूँ ,शाश्वत हूँ ,अमृत हूँ तब से हूँ सृष्टि में- जब मानव नही था ‘मानव ऊट पटांग ध्वनियाँ पहचाने जाने की प्रतीक्षा में थी निर्माण होना था समाजों का गढ़े जाने थे रिश्ते नाते धर्म का बीज तक नही था ज्ञात जाति,वर्ग लाखों वर्ष बाद का भविष्य थे नही था कोई नाम ,कोई परिचय परन्तु मैं थी … जानती थी मिलन को परिचय था देह से स्त्री देह का पुरुष देह से पुरुष देह का स्त्री देह से लाखों वर्षों से निरंतर हो रहा है समागम संघर्षों से पूर्व भी संघर्षों के साथ भी संघर्षों के बाद भी मैं नही जानती- समाज क्या है ? क्या बात है साब ! बहुत सुन्दर ! आपने सही चित्रण किया है और आपने जो विषय चुना है बहुत ही सार्थक

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: prabhuji prabhuji

के द्वारा: prabhuji prabhuji




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