शब्दों की दुनिया

चलो जलाए दीप वहां, जहाँ अभी अँधेरा है.

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तुम्हारे लिए ..

Posted On: 4 Oct, 2012 Others में

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तुम्हारे लिए ..
मुसाफिर, कांपते दिल को थाम
माथे पर चमकती पसीने की बूंदों को सहला
पलकों के पर्दे को उठा , आँखों को बहला
हनुमान चालीसा बुदबुदाते होठों पर उंगली रख
भयानक जंगल नहीं तुम्हारी स्थिति है ,नियति है
मन पर पड़े कुहासे को फूंक
सोई मांसपेशियों पर पानी के छीटें फेंक
चल उठ ,देख ,रास्ता कहाँ है ?
मंजिल किस्मत की नही ,हिम्मत की मोहताज़ है
पीछे मत देख , अन्दर देख ,आगे देख
नज़र में रास्ता खोजने की ललक जगा
बाजुओं में पहाड़ तोड़ने की ताक़त जगा
पैरों में धरती नापने का वेग जगा
तुम देखोगे तुम्हारा डर निकल भागा
अब मन में हिम्मत है
बाजुओं मे ताक़त है
पैरों मे गति है ..
तो रास्ते ही रास्ते हैं
मंजिलें ही मंजिलें है
– प्रभु दयाल हंस



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
October 5, 2012

पोस्ट दिल को छू गयी…….कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने……….बहुत खूब बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

    प्रभुजी के द्वारा
    October 5, 2012

    आप के प्रेरणादायी, उत्साहवर्धक शब्दों के लिए आभार .

shalinikaushik के द्वारा
October 4, 2012

बहुत प्रेरणादायक प्रस्तुति .

    प्रभुजी के द्वारा
    October 5, 2012

    शालिनी जी , धन्यवाद .


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